UP Bhulekh प्रमाणित खतौनी: Digitally Signed नकल कैसे निकालें

उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल में अब सामान्य खतौनी को हटाकर रियल टाइम खतौनी पर एकीकृत कर दिया गया है। पहले आधिकारिक पोर्टल upbhulekh.gov.in में सामान्य खतौनी को देख सकते थे और डाउनलोड कर सकते थे, लेकिन अब केवल रियल टाइम खतौनी है।

सामान्य या रियल टाइम खतौनी देखने के लिए अब आपको पोर्टल पर “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नक़ल देखे” वाला विकल्प मिलेगा, आप यहां से इसे देख सकते हैं। वहीं अगर बात करें प्रमाणित प्रति लेने की, तो इसके लिए भी आप छोटी सी ₹15 की फीस देकर “ऑनलाइन पेमेन्ट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिये यहाँ क्लिक करें” वाले विकल्प से ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं।

अब बात करते हैं कि सामान्य खतौनी आपकी खुद की जानकारी के लिए होती है। सामान्य खतौनी में 6 वर्षीय फसली चक्र का पारंपरिक रिकॉर्ड होता है, तहसील से नया आदेश होने के बाद भी इसकी जानकारी चेंज होने में काफी समय लग सकता है। वहीं रियल टाइम खतौनी की बात करें तो इसमें खातेदार के अंश निर्धारण और यूनीक कोड का सारा विवरण स्पष्ट होता है। रियल टाइम खतौनी में बैंक लोन यदि कोई लेता है, तो तुरंत चढ़ जाता है — बंधक हटाना हो या कोर्ट का स्टे ऑर्डर, सब कुछ यहां पर तुरंत दर्ज होता है और दिखाई देता है।

आज के इस लेख में हम आपको खतौनी की प्रमाणित प्रति कैसे निकालना है, उसकी पूरी जानकारी देंगे। साथ ही आपको ध्यान रखना है कि केवल उन्हीं वेबसाइट से अपनी खतौनी देखें या डाउनलोड करें, जिन वेबसाइट के अंत में .gov.in लिखा हो, क्योंकि अभी बहुत सी फेक वेबसाइट चल रही हैं।

Digitally Signed खतौनी क्या होती है

अब बात करते हैं कि सामान्य/रियल टाइम खतौनी क्या है और डिजिटल हस्ताक्षरित खतौनी क्या होती है। दोनों खतौनी एक जैसी होती हैं — रियल टाइम खतौनी और सामान्य खतौनी एक ही चीज है, पहले अलग-अलग होती थी। डिजिटल हस्ताक्षरित खतौनी में केवल यह अंतर होता है कि राजस्व परिषद द्वारा ₹15 की फीस देकर इसे जारी कर दिया जाता है। इसमें कानूनी उपयोग के लिए लेखपाल या तहसीलदार के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती है। इसमें यूनिक सर्टिफिकेट नंबर होता है, जो पोर्टल पर 100% वेरीफाइड होता है। डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति आपके बैंक, कोर्ट और सरकारी दफ्तरों — सभी जगह काम आएगी और मान्य है।

वहीं अगर हम सामान्य खतौनी की बात करें, तो आप इसे ऑनलाइन देख सकते हैं, यह बिल्कुल मुफ्त होती है। इसमें कोई भी डिजिटल सिग्नेचर या मोहर नहीं होता है, ना होने के कारण आप इसे ऑनलाइन वेरीफाई नहीं कर सकते, और इसका प्रयोग कानूनी या आधिकारिक कार्य में नहीं कर सकते हैं। यह केवल निजी जानकारी और रिकॉर्ड देखने हेतु होता है।

UP Bhulekh पर Login/Registration कैसे करें

उत्तर प्रदेश भूलेख का आधिकारिक पोर्टल upbhulekh.gov.in पर सामान्य खतौनी देखने के लिए किसी प्रकार की रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है, ना आपको लॉगिन करना पड़ता है। लेकिन यदि आपको डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रतिलिपि चाहिए, तो आपको यहां पर अपनी जानकारी — ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर — पुष्टि के लिए डालनी होगी, ताकि यह साबित हो सके कि आपने ही यह सर्टिफाइड खतौनी मांगी है।

क्योंकि आपकी खतौनी कोई भी मांग ले, यह बात सही नहीं है। तो भविष्य में अगर आपको पता होना चाहिए कि किसने आपकी खतौनी मांगी है, तो उसका ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर पता होना चाहिए।

Digitally Signed खतौनी डाउनलोड करने का तरीका (Step-by-Step)

  • डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति लेने के लिए आपको upbhulekh.gov.in के आधिकारिक पेज पर जाना है।
  • अब यहां पर आपको एक विकल्प मिलेगा — “ऑनलाइन पेमेन्ट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिये यहाँ क्लिक करें”।
  • इस पर क्लिक करने के बाद आपको अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना है और OTP भेजें पर क्लिक कर देना है।
  • आपके मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, उसमें लिखा होगा — उदाहरण: “खतौनी की प्रमाणित प्रति के लिए ऑनलाइन आवेदन हेतु OTP — राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश”। अब उस OTP को दर्ज करें और कैप्चा कोड भरकर लॉगिन बटन पर क्लिक कर दें।

  • OTP दर्ज करने के बाद नया पेज खुलकर आएगा। यहां पर आपको अपनी खतौनी को खोजना है — इसके लिए जनपद चुनें, तहसील चुनें, ग्राम चुनें, और वर्तमान खतौनी या पुरानी फसली वर्ष का चयन कर लें।
  • उसके बाद अगर आपके पास खसरा संख्या या गाटा संख्या है, तो उसके माध्यम से खोज सकते हैं। नहीं तो:
    • खाता संख्या द्वारा खोज सकते हैं
    • खातेदार के नाम द्वारा खोज सकते हैं
    • भूमि श्रेणी द्वारा खोज सकते हैं
    • नामांतरण दिनांक से खोज सकते हैं

  • अब आपके सामने उद्धरण खतौनी की प्रति खुलकर आ जाएगी। वहां पर आपको एक विकल्प दिखेगा — “ऑनलाइन पेमेन्ट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिये यहाँ क्लिक करें”।

 

  • जैसे ही आप क्लिक करेंगे, तो कई बार एक मैसेज आता है —

  • “Dear User, due to certain unavoidable circumstances, you are not permitted to access the further information.”
  • यदि यह मैसेज आपको दिखे, तो इसका मतलब है कि आपका सेशन काफी लेट हो गया है। तो आपको दोबारा से सारी प्रक्रिया फिर से ट्राई करनी पड़ेगी।
  • नहीं तो आपको ₹15 की फीस देकर अपनी प्रमाणित प्रति को डाउनलोड कर लेना है।

तहसील से प्रमाणित (Stamped) खतौनी कैसे लें — जब Digital Copy काफी न हो

जैसा कि हम जानते हैं कि upbhulekh पोर्टल से डाउनलोड की गई डिजिटल हस्ताक्षरित खतौनी पूरी तरह से कानूनी रूप से मान्य होती है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियां होती हैं जिनमें डिजिटल कॉपी को स्वीकार नहीं किया जाता। वहां पर आपको तहसील की फिजिकल कॉपी — लेखपाल या तहसीलदार के हस्ताक्षर के साथ मोहर लगी हुई — अनिवार्य होती है।

खतौनी की हस्ताक्षरित व स्टांप लगी हुई प्रमाणित प्रति की जरूरत राष्ट्रीयकृत बैंक एवं बड़े वित्तीय लोन में पड़ जाती है, या जो गंभीर राजस्व अदालत के मामले हैं वहां जरूरत पड़ती है, या अगर आप रजिस्ट्री करने जा रहे हैं तो वहां पर भी आपको उसकी जरूरत पड़ती है।

स्टांप लगी हुई हस्ताक्षरित खतौनी की प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए आपको भू अभिलेख अनुभाग — जिसे रिकॉर्ड रूम कहते हैं — या जन सुविधा केंद्र पर जाना होगा। वहां पर आपको आपके संबंधित क्षेत्र की तहसील परिसर में स्थित राजस्व अभिलेख कक्ष में संपर्क करना होगा। वहां पर आपको एक प्रमाणित प्रति का आवेदन पत्र भरकर देना है, जिसमें आपको अपनी जमीन का सारा विवरण — गांव का नाम, खसरा/गाटा संख्या, खाता संख्या — यह सभी जानकारी दर्ज करनी है, और अपना पहचान पत्र भी उसके साथ अटैच कर देना है।

उसके बाद लेखपाल या तहसीलदार स्वयं सत्यापित कर देंगे और अपनी मोहर व हस्ताक्षर लगाकर आपको इसकी प्रतिलिपि दे देंगे। इसके बदले में आपको एक भौतिक प्रमाणित प्रति पाने के लिए एक न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क आपसे लिया जाएगा।

FAQ

  • खतौनी की प्रमाणित प्रति लेने के लिए क्या तहसील जाना जरूरी है?
    नहीं, अब आप ऑनलाइन तरीके से खतौनी की प्रमाणित प्रति निकाल सकते हैं। लेकिन यदि आपको मोहर लगी हुई हस्ताक्षरित प्रति चाहिए, तो आपको तहसील जाना होगा।
  • डिजिटल प्रमाणित खतौनी की नकल कितने दिन के लिए वैलिड रहती है?
    देखिए, प्रमाणित खतौनी की कोई भी निश्चित एक्सपायरी तारीख नहीं होती है, लेकिन कई बार बैंक, कोर्ट या सरकारी दफ्तर 3 से 6 महीने से अधिक पुरानी खतौनी को नहीं मानते हैं — वह कहते हैं कि नई खतौनी लाओ। इसका कारण सिंपल है — किसी ने जमीन बेची है, या नया नामांतरण/नया लोन लिया है, या दाखिल-खारिज हो चुका है, तो बार-बार खतौनी अपडेट होती है। इसलिए किसी भी आधिकारिक काम के लिए हमेशा लेटेस्ट खतौनी ही लगानी होती है।

  • क्या सर्टिफाइड खतौनी और रियल टाइम खतौनी एक ही है?
    देखिए, इसका डेटा दोनों में एक ही होता है, लेकिन उनके उपयोग अलग हैं। रियल टाइम खतौनी को देखने के लिए पूरी तरह से फ्री/मुफ्त है, लेकिन इस पर डिजिटल सिग्नेचर नहीं होते — यह केवल आपको देखने के हेतु होती है। और प्रमाणित खतौनी की बात करें तो यह फ्री नहीं होती, इसके लिए फीस है — कम से कम ₹15। इस पर डिजिटल सिग्नेचर और यूनिक सर्टिफिकेट नंबर होता है, इसे ही आप बैंक लोन व कानूनी काम में उपयोग कर सकते हैं।

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