जमीन खरीदने या विरासत में मिलने के बाद सिर्फ रजिस्ट्री होना काफी नहीं है। जब तक राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में नया नाम दर्ज नहीं होता, तब तक पुराना मालिक ही सरकारी दस्तावेजों में दिखता रहता है। इसी प्रक्रिया को दाखिल-खारिज या म्यूटेशन कहा जाता है, और उत्तर प्रदेश में इसे नामांतरण भी कहते हैं।
यह प्रक्रिया न होने पर बैंक लोन, प्रॉपर्टी टैक्स, आगे की बिक्री और सरकारी योजनाओं में दिक्कत आ सकती है, क्योंकि तहसील और नगर निगम जैसे विभाग खतौनी में दर्ज नाम को ही असली रिकॉर्ड मानते हैं।
Official Portals: upbhulekh.gov.in | vaad.up.nic.in | Helpline: 1076
रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज में फर्क
यह सबसे ज्यादा confuse करने वाला हिस्सा है।
रजिस्ट्री (Registry) सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (IGRSUP) में होती है और यह कानूनी रूप से मालिकाना हक ट्रांसफर करने का दस्तावेज है। दाखिल-खारिज (Mutation) राजस्व विभाग की प्रक्रिया है, जो खतौनी में नए मालिक का नाम दर्ज करती है। रजिस्ट्री हो जाने के बाद भी, जब तक दाखिल-खारिज नहीं होता, खतौनी में पुराना नाम ही दिखता रहेगा।
| प्रक्रिया | होती कहां है | क्या करती है |
|---|---|---|
| रजिस्ट्री | सब-रजिस्ट्रार कार्यालय | मालिकाना हक का कानूनी ट्रांसफर |
| दाखिल-खारिज | तहसील (राजस्व विभाग) | खतौनी में नया नाम दर्ज करना |
दाखिल-खारिज कब जरूरी होता है
जमीन खरीदी हो, विरासत में मिली हो, गिफ्ट डीड से मिली हो, परिवार में बंटवारा हुआ हो, या कोर्ट के आदेश से मालिकाना हक बदला हो — हर मामले में दाखिल-खारिज जरूरी होता है।
धारा 34 और धारा 33(1) — क्या फर्क है?
UP Revenue Code में दाखिल-खारिज दो अलग धाराओं के तहत होता है:
धारा 34 (Section 34) — खरीद-बिक्री, गिफ्ट डीड और कोर्ट आदेश से हुए transfer के लिए। यही सबसे common mutation है। vaad.up.nic.in पर “धारा 34” के तहत cases listed होते हैं।
धारा 33(1) (Section 33) — विरासत/उत्तराधिकार के मामले में, जब जमीन मृत्यु के बाद वारिसों के नाम होती है।
दोनों की process portal पर अलग option से शुरू होती है — आवेदन करते समय सही धारा चुनें।
दाखिल-खारिज के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन का प्रकार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए दस्तावेज भी उसी हिसाब से बदलते हैं।
| आवेदन का प्रकार | जरूरी दस्तावेज |
|---|---|
| बिक्री (Sale) | रजिस्टर्ड बैनामा, पुरानी खतौनी, पहचान प्रमाण |
| विरासत (Inheritance) | मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र, पुरानी खतौनी |
| गिफ्ट (Gift) | रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड, पहचान प्रमाण |
| बंटवारा (Partition) | बंटवारा नामा, सभी हिस्सेदारों की सहमति |
| कोर्ट आदेश | संबंधित न्यायालय का आदेश |
सभी मामलों में आवेदन फॉर्म, आधार जैसा पहचान प्रमाण और मौजूदा खतौनी की कॉपी सामान्यतः जरूरी रहती है।
बिना वसीयत के विरासत (Intestate Succession): अगर मृतक ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी है, तो वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) सबसे जरूरी document बन जाता है। यह तहसील से बनवाया जाता है। इसके साथ मृत्यु प्रमाण पत्र और पुरानी खतौनी मिलाकर धारा 33(1) के तहत आवेदन होता है।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज कैसे करें
सबसे पहले UP Bhulekh पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है — इसके लिए मोबाइल नंबर, ईमेल और एक पहचान प्रमाण की जरूरत पड़ती है।
रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करें और सेवाओं की सूची में “Mutation” या “दाखिल-खारिज आवेदन” विकल्प चुनें। आवेदन फॉर्म में जमीन की जानकारी (जिला, तहसील, गांव, खाता/गाटा संख्या), ट्रांसफर का प्रकार और आवेदक की जानकारी भरनी होती है।
इसके बाद जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें। फॉर्म जमा करने पर एक acknowledgment/म्यूटेशन नंबर मिलता है, जिसे संभाल कर रखना जरूरी है क्योंकि आगे स्टेटस इसी नंबर से चेक होगा।
खसरा/गाटा नंबर से status कैसे देखें: vaad.up.nic.in पर “वाद खोज विधि” में गाटा संख्या डालकर भी उस plot से जुड़े सभी pending mutation cases देखे जा सकते हैं। यह तरीका तब काम आता है जब acknowledgment number न हो।
आवेदन जमा करने के बाद क्या होता है
आवेदन जमा होने के बाद यह सीधे स्वीकृत नहीं होता, बल्कि कुछ चरणों से गुजरता है:
- लेखपाल द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन — मौके पर जाकर जमीन और दस्तावेजों की जांच
- आपत्ति अवधि (Objection Period) — अगर किसी को आवेदन पर आपत्ति है तो इस दौरान दर्ज कराई जा सकती है
- नायब तहसीलदार/तहसीलदार का अंतिम आदेश — सारी जांच पूरी होने के बाद अंतिम मंजूरी मिलती है
पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः 30 से 45 दिन का समय लगता है, हालांकि आपत्ति आने या दस्तावेज अधूरे होने पर यह अवधि बढ़ भी सकती है।
दाखिल-खारिज का स्टेटस कैसे चेक करें
स्टेटस चेक करने के लिए UP Bhulekh पोर्टल के अलावा एक और महत्वपूर्ण पोर्टल है — RCCMS (Revenue Court Computerised Management System), जिसका पता है vaad.up.nic.in। यह उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों से जुड़े सभी मामलों — जिसमें दाखिल-खारिज भी शामिल है — का आधिकारिक ट्रैकिंग सिस्टम है।
जमा करते समय जो कंप्यूटरीकृत वाद संख्या (Computerised Case Number) मिलती है, उसे vaad.up.nic.in पर “वाद खोज विधि” सेक्शन में डालकर सुनवाई की तारीख, कोर्ट में हुई कार्यवाही और अंतिम आदेश की स्थिति देखी जा सकती है।
वाद संख्या भूल गए — कैसे ढूंढें?
अगर computerised case number याद नहीं रहा तो vaad.up.nic.in पर ये तरीके आजमाएं:
नाम से खोज: “खोज विधि” में आवेदक या विपक्षी का नाम डालें।
तहसील और गांव से खोज: जिला और तहसील select करके उस area के सभी pending cases list हो जाते हैं।
गाटा/खसरा नंबर से: गाटा संख्या डालकर उस plot से जुड़े सभी cases ढूंढ सकते हैं — यह dakhil kharij status by khasra number check करने का सबसे reliable तरीका है।
आपत्ति (Objection) आने पर क्या करें
कोई पक्ष — जैसे संयुक्त हिस्सेदार या पड़ोसी — अगर आपत्ति दर्ज कराता है, तो मामला सीधे मंजूर नहीं होता। नायब तहसीलदार इस पर अलग से सुनवाई करते हैं, और ऐसी स्थिति में जरूरी दस्तावेज (रजिस्टर्ड बैनामा, पहचान प्रमाण) साथ लेकर सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी होता है।
RCCMS पोर्टल पर वाद संख्या डालकर यह भी पता चल जाता है कि आपत्ति दर्ज हुई है या नहीं, और अगली सुनवाई की तारीख क्या है।
दाखिल-खारिज Reject हो जाए — क्या करें?
अगर आवेदन reject हो जाता है तो:
पहला कदम: Rejection का कारण vaad.up.nic.in पर order में देखें।
दूसरा कदम: Documents की कमी थी तो जरूरी papers add करके fresh application दें।
तीसरा कदम: अगर एकतरफा (ex-parte) order आया है तो Caveat Petition दायर करें ताकि दूसरा पक्ष सुने बिना order न हो।
चौथा कदम: नायब तहसीलदार के order से असंतुष्ट हों तो राजस्व परिषद (Board of Revenue) में अपील की जा सकती है — यह UP का सबसे ऊंचा Revenue Court है।
दाखिल-खारिज में आम समस्याएं और समाधान
लेखपाल पैसे मांगे तो?
दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया सरकारी तौर पर निःशुल्क है। लेखपाल द्वारा field verification report देना उनकी सरकारी जिम्मेदारी है, इसके लिए कोई अलग शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
अगर लेखपाल पैसे मांगे — jansunwai.up.nic.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। CM Helpline 1076 पर call करें। SDM कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
नाम गलत दर्ज हो जाए तो?
अगर dakhil kharij approve होने के बाद खतौनी में नाम या अन्य जानकारी गलत दिखे — upbhulekh.gov.in/ansh/ पर Correction application दें। Spelling या संरक्षक (पिता/पति) के नाम में छोटी गलती का सुधार ज्यादातर मामलों में जल्दी हो जाता है।
Section 34 UP Revenue Code — समय सीमा
UP Revenue Code की धारा 34 के तहत रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के लिए कोई fixed deadline नहीं है। लेकिन जितनी देर होगी, उतना ज्यादा risky रहेगा — seller के नाम पर loan, विवाद, या उसी जमीन की दूसरी sale की संभावना बनी रहती है। इसलिए registry के तुरंत बाद आवेदन कर देना बेहतर है।
दाखिल-खारिज के बाद खतौनी में बदलाव
दाखिल-खारिज स्वीकृत होने के बाद भी नया नाम खतौनी में दिखने में कुछ दिन लग सकते हैं, क्योंकि रिकॉर्ड अपडेट होने में समय लगता है।
अगर काफी समय बाद भी पुराना नाम ही दिख रहा हो, तो एक बार आवेदन का स्टेटस दोबारा जांच लें — हो सकता है कि प्रक्रिया अभी पूरी ही न हुई हो।
दाखिल-खारिज न होने पर क्या नुकसान हो सकता है
बैंक लोन लेने में दिक्कत आती है और प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस पुराने मालिक के नाम आते रहते हैं। बिजली-पानी कनेक्शन ट्रांसफर नहीं होता। आगे जमीन बेचनी हो तो खरीदार को title पर संदेह होगा — और सरकारी अधिग्रहण की स्थिति में मुआवजा मिलने में उलझन आ सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री एक ही चीज है? नहीं। रजिस्ट्री सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में मालिकाना हक का कानूनी ट्रांसफर है, जबकि दाखिल-खारिज तहसील में खतौनी को अपडेट करने की अलग प्रक्रिया है।
दाखिल-खारिज में कितना समय लगता है? सामान्यतः 30 से 45 दिन, लेकिन आपत्ति या अधूरे दस्तावेजों की स्थिति में समय बढ़ सकता है।
क्या दाखिल-खारिज ऑनलाइन हो सकता है? हां, UP Bhulekh पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद Mutation विकल्प से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
दाखिल-खारिज न कराने पर क्या होगा? पुराना मालिक ही राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा, जिससे लोन, टैक्स और आगे की बिक्री में दिक्कत आ सकती है।
विरासत में मिली जमीन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए? मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र और मृतक के नाम की पुरानी खतौनी सामान्यतः जरूरी होते हैं।
आवेदन का स्टेटस कैसे पता करें? vaad.up.nic.in पर वाद संख्या से। कोर्ट-स्तर की पूरी जानकारी के लिए RCCMS सबसे भरोसेमंद है।
vaad.up.nic.in क्या है? यह उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों का आधिकारिक Computerised Case Management System है।
रजिस्ट्री के कितने दिन बाद दाखिल-खारिज करना चाहिए? UP Revenue Code Section 34 में कोई fixed deadline नहीं है, लेकिन registry के तुरंत बाद करना बेहतर है।
Real Time Khatauni में दाखिल-खारिज का असर कब दिखता है? तहसीलदार का अंतिम आदेश पारित होने के बाद रिकॉर्ड अपडेट होने में कुछ दिन लग सकते हैं।
वाद संख्या भूल गए तो status कैसे देखें? vaad.up.nic.in पर नाम, तहसील/गांव या गाटा/खसरा संख्या से case ढूंढा जा सकता है।
दाखिल-खारिज reject हो जाए तो क्या करें? vaad.up.nic.in पर rejection का कारण देखें। Documents पूरे करके fresh application दें या Naib Tehsildar court में अपील करें।
लेखपाल पैसे मांगे तो क्या करें? दाखिल-खारिज निःशुल्क है। jansunwai.up.nic.in पर शिकायत दर्ज करें या CM Helpline 1076 पर call करें।
बिना वसीयत के विरासत में मिली जमीन — क्या process है? धारा 33(1) के तहत आवेदन करें। Legal Heir Certificate (तहसील से), मृत्यु प्रमाण पत्र और पुरानी खतौनी जरूरी documents हैं।
आधिकारिक Links
| सेवा | Link |
|---|---|
| UP Bhulekh पोर्टल | upbhulekh.gov.in |
| IGRSUP (रजिस्ट्री) | igrsup.gov.in |
| RCCMS — वाद स्थिति | vaad.up.nic.in |
| नाम Correction | upbhulekh.gov.in/ansh/ |
| Jansunwai (शिकायत) | jansunwai.up.nic.in |
| CM Helpline | 1076 |